Saturday, October 8, 2016

लो, अब पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा खान ने भी आतंकवादियों को कोस दिया। पर इतनी देर से क्यों?


उड़ी में आतंकवादी हमले के पश्चात सभी भारतीय ताकते बैठे थे कि भारत में रह कर, भारतीय फिल्मों में काम कर के, भारतीयों से मान-सम्मान और मोटा माल कमाने वाले पाकितान से आये कलाकार कब आतंकवाद के विरोध में कुछ फूटेंगे। इस अवधि में अच्छी-खासी वैचारिक धक्कम- धक्की हुई। जहाँ पाकिस्तानी कलाकारों की चुप्पी के कारण भारतीय जनता सुलग रही थी, वही भारत का तथाकथित ‘बुद्धिजीवी’ वर्ग इस सुलगे हुए वर्ग को ये समझाने में लगा हुआ था कि पाकिस्तानी कलाकार केवल कलाकार हैं, आतंकवादी नहीं — जैसे जनता को ये पता ही नहीं था। मानो , बुद्धिजीवियों ने धीमी आंच वाले कोयलों पर सीधा पेट्रोल का छिड़काव कर दिया। फिर हुआ वही जो होना था — जहाँ पाए गए, तहाँ ...... दिए गए तबियत से! कोई मीता वशिष्ठ और ओम पुरी जी से पूछे!




अब इतना सब रामायण-महाभारत होने के बाद पहले फवाद खान ने फेसबुक पर एक ‘शांति सन्देश’ चिपका दिया। आतंकवाद की पुंगी बजाना तो छोड़िये, नाम तक ना लिया उसका। मने, भिया, ऐसा ही करना था तो काहे पोस्टियाए? खैर, आपका फेसबुक पेज… आप चाहे जो छाप दो!
अब माहिरा खान ने फेसबुक पर पोस्ट चेपा है। भगवान्-जीजस-अल्लाह ताला(मने ऊपर वाले के जितने नाम हैं सब को यहाँ उड़ेल लो… हम सेक्युलर हैं!) का लाख-लाख धन्यवाद — कन्या ने इतना साहस और बुद्धि दिखाई कि आतंकवाद को गरिया दिया। उनके पोस्ट के हिंदी अनुवाद पर ध्यान दे  —
“एक अभिनेत्री के रूप में कार्यरत पिछले ५ वर्षों की कालावधि में, मुझे विश्वास है कि मैंने प्रोफेशनल रहकर और अपनी क्षमताओं के द्वारा पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर के सदा अपने देश की गरिमा बनाए रखी।
एक पाकिस्तानी और एक वैश्विक-नागरिक होने के नाते मैं आतंकवाद और खून-खराबे की कड़ी निंदा करती हूँ, चाहे वो किसी भी जगह हो। मुझे खून-खराबे और युद्ध में कोई रूचि नहीं। मैं सदा ऐसे विश्व की आशा करती हूँ जहाँ मेरी संतान इनसे बची रह सके; और सभी से ऐसे विश्व की कामना करने का अनुरोध करती हूँ।
इसी थोड़ी सी कालावधि में समझदारी और भलाई में मेरा विश्वास प्रगाढ़ हुआ है। आपके संदेशों और समर्थन के लिए धन्यवाद।
सदा शांति की कामना और प्रार्थना करते हुए
— माहिरा खान”


अब तक जहाँ लोग ये पूछते रहे कि पाकिस्तानी कलाकार आतंकवाद को गरिया क्यों नहीं रहे, अब दूसरे प्रश्न पर मस्तिष्क का चरखा चला रहे हैं — इस निंदा वाली औपचारिकता/फॉर्मेलिटी के लिए इतना समय क्यों लग गया? अब तक इन्होंने चुप्पी क्यों साध रखी थी?
जब तक ये ‘कलाकार’ मुँह में दही जमाए बैठे थे, तब तक ‘बुद्धिजीवी’ ये तर्क ठेल रहे थे कि अपनी ही सरकार के विरुद्ध कोई बयान देना इन कलाकारों के लिए कठिन कार्य होगा। तो हे महानुभावों, इस तर्क के अनुसार आप कह रहे हैं कि ये लोग जानते-मानते हैं कि इन आतंकी गतिविधियों के पाकिस्तानी सरकार की ही कारगुजारियाँ हैं? यदि ये मान लिया जाए तो इनकी चुप्पी तो और अधिक ‘नमकहरामी’ वाली बात हो जाएगी! भारत में कमा-खा कर भारत पर हुए अत्याचारों पर चुप रहना!
अब आखिरकार इन दो कलाकारों ने कुछ बोला। माहिरा ने संतोष-जनक कुछ कहा, फवाद ने तो… खैर छोडिये। पर अब वही दूसरा प्रश्न मस्तिष्क में चक्करघिन्नी हो रहा है — इतना समय क्यों लग गया? क्या फिल्मों के बहिष्कार के नारों से नींद उड़ी है अब इनकी? नहीं, मल्लब, एक फेसबुक पोस्ट चिपकाने में इतना समय लग गया? अब बचने के लिए केवल ये बहाना बनाया जा सकता है कि इनके यहाँ इन्टरनेट नहीं चल रहा था। बाकी, जनता सयानी है ही… पब्लिक सब जानती है!

महागौरी अष्टमी पूजन | Mahagauri Ashtami Puja | 8th Chaitra Navratri

दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है. इस वर्ष 14 अप्रैल 2016 को अष्टमी तिथि रहेगी. महागौरी आदी शक्ति हैं इनके तेज से संपूर्ण सृष्टि प्रकाश-मान है इनकी शक्ति अमोघ फलदायिनी है. महागौरी  की चार भुजाएं हैं उनकी दायीं भुजा अभय मुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में त्रिशूल शोभता है. बायीं भुजा में डमरू डम डम बज रही है और नीचे वाली भुजा से देवी गौरी भक्तों की प्रार्थना सुनकर वरदान देती हैं.
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

महागौरी पौराणिक महत्व | Historical Significance of Worshiping Mahagauri

दुर्गा सप्तशती में शुभ निशुम्भ से पराजित होकर गंगा के तट पर जिस देवी की प्रार्थना देवतागण कर रहे थे वह महागौरी हैं. देवी गौरी के अंश से ही कौशिकी का जन्म हुआ जिसने शुम्भ निशुम्भ के प्रकोप से देवताओं को मुक्त कराया. यह देवी गौरी शिव की पत्नी हैं यही शिवा और शाम्भवी के नाम से भी पूजित होती हैं.
एक कथा अनुसार भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ जाता है. देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान इन्हें स्वीकार करते हैं और शिव जी इनके शरीर को गंगा-जल से धोते हैं तब देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं, पार्वती जी का रंग अत्यंत ओजपूर्ण होता है, उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत और कुन्द के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती है, उनके वस्त्र और आभूषण से प्रसन्न होकर देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं तथा तभी से इनका नाम गौरी पड़ा.

महागौरी पूजन | Mahagauri Puja

नवरात्रे के दसों दिन कुवारी कन्या भोजन कराने का विधान है परंतु अष्टमी के दिन का विशेष महत्व है. इस दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं. देवी गौरी  की पूजा का विधान भी पूर्ववत है अर्थात जिस प्रकार सप्तमी तिथि तक आपने मां की पूजा की है उसी प्रकार अष्टमी के दिन भी देवी की पंचोपचार सहित पूजा करें. इस दिन कुमारी कन्याओं का पूजन किया जाता है. कन्या या कंजक पूजन में सामर्थ्य के अनुसार इन कन्याओं को भोजन के लिए आमंत्रित करते हैं. एक से दस वर्ष तक की कन्याओं का पूजन किया जाता है. इससे अधिक उम्र की कन्याओं को देवी पूजन में वर्जित माना गया है. कन्या पूजन में सर्वप्रथम कन्याओं के पैर धुलाकर उन्हें आसन पर एक पंक्ति में बिठाते हैं. मंत्र द्वारा कन्याओं का पंचोपचार पूजन करते हैं.
विधिवत कुंकुम से तिलक करने के उपरांत उनकी कलाईयों पर कलावा बांधा जाता है. इसके पश्चात उन्हें हलवा, पूरी तथा रुचि के अनुसार भोजन कराते हैं. पूजा करने के पश्चात जब कन्याएं भोजन ग्रहण कर लें तो उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें तथा यथासामर्थ्य कोई भी भेंट तथा दक्षिणा दें कर विदा करें. इस प्रकार श्रद्धा पूर्वक अष्टमी पूजन करने से भक्तों समस्त इच्छाएं पूर्ण होती हैं.

ऐसे करें कंजक पूजन


कंजक पूजन के दिन मां महागौरी का पूजन किया जाता है। कंजक पूजन और लोंगड़ा पूजन के उपरांत नवरात्र की पूजा का समापन हो जाता है। नौ दिन तक उपवास रखकर मां दुर्गा का पूजन करने वाले भक्त अष्टमी अथवा नवमी को अपने व्रत का समापन करते हैं।

नवरात्र के दौरान आठवें अथवा नौवें दिन सुबह के समय कन्या पूजन किया जाता है। माना जाता है कि आहुति, उपहार, भेंट, पूजा-पाठ और दान से मां दुर्गा इतनी खुश नहीं होतीं, जितनी कंजक पूजन और लोंगड़ा पूजन से होती हैं। अपने भक्तों को सांसारिक कष्टों से मुक्ति प्रदान करती हैं।
 
कन्या पूजन के लिए जिन कन्याओं को अपने घर आमंत्रित करें उनकी उम्र दो वर्ष से कम और नौ वर्ष से अधिक न हो क्योंकि इसी उम्र की कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना गया है। कन्याओं के साथ एक लोंगड़ा यानी लड़के को भी जिमाते हैं। माना जाता है कि लोंगड़े के अभाव में कन्या पूजन पूर्ण नहीं होता।
 
एक कन्या का पूजन करने से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दो कन्याओं का पूजन करने से भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। तीन कन्याओं की पूजा करने से धर्म, अर्थ व काम, चार कन्याओं की पूजा से राज्यपद, पांच कन्याओं की पूजा करने से विद्या, छ: कन्याओं की पूजा द्वारा छ: प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। सात बालिकाओं की पूजा द्वारा राज्य की, आठ कन्याओं की पूजा करने से धन-संपदा तथा नौ कन्याओं की पूजा से पृथ्वी प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।

ऐसे करें कंजक पूजन

कन्याओं और लोंगड़े के चरण धो कर उन्हें पंक्तिबंद्ध कर आसन पर बैठाएं। कलाई पर मौली बांधें और ललाट पर रोली से तिलक लगाएं। मां दुर्गा को सुखे काले चने, हलवा, पूरी, खीर, पूआ व फल आदि का भोग लगा कर कन्याओं और लोंगड़े को प्रसाद दें साथ में उनके मनभावन तोहफे और कुछ न कुछ दक्षिणा अवश्य दें। कन्याओं को विशेष तौर पर लाल चुन्नी और चूडि़यांं भी चढ़ाई जाती हैं। कन्याओं को घर से विदा करते समय उनसे आशीर्वाद के रूप में थपकी अवश्य लें।

ग्रंथों में वर्णित व्यवस्था के अनुसार आसन बिछाकर एक पंक्ति में गणेश, बटुक (बालक, ब्रह्मचारी) तथा कुमारियों-कन्याओं को बिठाकर पंचोपचार द्वारा उनका क्रमश: इन मंत्रों ॐ  गं गणपत ऐ नम:,ॐ व बटुकाये नम:, ॐ कुमार्ये नम: से ध्यान पूजन करने का विधान है। इसके बाद हाथ में पुष्प पूजित कुमारियों की निम्र प्रकार प्रार्थना की जाए।
 
मंत्राक्षरमणी लक्ष्मी मातृणा रुपधारिणीम।
नवदुर्गात्मिकां साक्षात कन्यामावाध्याम्हम्।
जगवश्वये जगद्वनंधे सर्वशक्तिस्वरूपिणी।
पूजां गृहणण कौमारि जगन्मातर्नमोदस्तुते।।
 
इसके बाद उन्हें भोजनादि कराकर यथाशक्ति दक्षिणा, वस्त्र और आभूषण देने का विधान ग्रंथों में है। कुमारी पूजन में केवल 10 वर्ष तक की कन्या को ही शामिल किया जाना चाहिए। इससे बड़ी उम्र की कन्या को कुमारी पूजन के लिए वर्जित माना गया है। अलग-अलग आयु की कन्याओं का अलग-अलग स्वरूप माना जाता है।
 
इसमें 2 वर्ष की कन्या कुमारी, तीन वर्ष की कन्या त्रिमूर्तिनी, 4 वर्ष की कल्याणी, 5 वर्ष की रोहिणी, 6 वर्ष वाली कल्याणी, 7 वर्ष वाली चंडिका, आठ वर्ष वाली शाम्भवी, नौ वर्ष वाली दुर्गा तथा 10 वर्ष वाली कन्या सुभद्रा स्वरूपा मानी जाती है।

Friday, October 7, 2016

Last Minute Tips for CA Students

Almost a month left for your exams and vagabond thoughts already filing up your minds and occluding your senses. This is the time when you start struggling with your beloved books, your family and of course yourself. You are all messed up. 8 months gone in a wink of an eye and you still find yourself nowhere. But trust me you have covered 80% of your journey, just an extra effort for remaining journey required. Majority of you who were planning to give both the groups of CA exams may have already switched to one group. On one side discouragement hovering you all around and on the other side family and peer pressure ruining your mental strength. In this time I would accentuate certain tips that will help you sail through this phase:-
  1. Empty your mind which is huddled with umpteen miscellaneous thoughts and start heeding to yourself.
  2. Disregard pressure exerted by external environment but do perceive your inner voice.
  3. Surrendering without fighting back is inacceptable. You are like a lamp which needs to be kindled even in furious storm.
  4. For this last month brush off everything and let everything go. Just be loyal to your goals.
  5. Read, learn, reiterate and revise what is already finished by you in these 8 months. Don’t attempt new topics now.
  6. We prefer going for marks oriented study and that’s what sounds practical too. But what I will suggest is study for getting excellence and grip on a particular subject.
It is rightly said by Jim Morrison-
 
“There are things known and things unknown and in between are the doors of perception.”
You know where you stand and what you have achieved. Yes, you don’t know the outcome of your efforts. The problem with us is that we start counting the eggs before it hatches.  Let the door of perception be closed in your case and do what you ought to be doing and leave the rest on your “Hard Work”. All the best.

Citizenship Bill: West Bengal CM Mamata Banerjee Supports Bhupen Hazarika's Son

West Bengal chief minister Mamata Banerjee on Tuesday came out in support of Assamese singer-composer Bhupen Hazarika's son on the Ci...