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Monday, October 10, 2016

कैसे लिया उड़ी का बदला, सर्जिकल स्ट्राइक की पूरी कहानी...

पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और छद्मयुद्ध से निपटने के लिए कई सालों से योजना बनाई जा रही थी, परंतु इसे मूूर्तरूप दिया मोदी सरकार ने। मोदी सरकार ने विश्व में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए बता दिया कि हमारी धरती पर किसी भी आतंकवादी घटना को अब न भारत भूलेगा, न ही माफ करेगा। उड़ी में हुए आतंकी हमले के बाद से ही सरकार और सेना पर जनता और विपक्षी पार्टियों का दबाव था।   


भारतीय सेना के प्रवक्ता ने पहले ही बता दिया था कि वे प्रतिकार करेंगे लेकिन अपने समय और चुने गए स्थान पर। इसके बाद प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि उड़ी हमलावरों को बख्शा नहीं जाएगा।  सेना और सरकार ने जो कहा, वही किया लेकिन इतनी सटीक और दुस्साहसी कार्रवाई के पीछे की कहानी भी उतनी ही रोमांचक है। भारतीय सेना के विशेष सैन्य दस्ते ने नियंत्रण रेखा पार कर आतंकवादियों के लांच पैड पर हमला किया और 6 से अधिक शिविर नष्ट कर लगभग 45 आतंकियों को मार गिराया।  लेकिन इस हमले के पीछे की कहानी किसी रोमांचक थ्रिलर से कम नहीं।   

एक अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक 22 सितंबर को प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और तीनों सेना प्रमुखों के बीच सर्जिकल स्ट्राइक, मिसाइल या हवाई हमले सहित कई विकल्पों पर  विचार-विमर्श हुआ। 23 सितंबर को पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने अजीत डोभाल और रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को सर्जिकल हमले की मंजूरी दे दी थी।  

भारतीय खुफिया सूत्रों ने बताया कि 20 से लेकर 23 सितंबर तक पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा पर अपनी फौज को हाईअलर्ट पर रखा था। यहीं नहीं, उसने अपने सभी राडार और सीमा पर लगे मोशन सेंसर भी सक्रिय कर दिए थे। हवाई हमले की आशंका से घबराए पाकिस्तान ने अपने लड़ाकू विमानों को भी अप्रत्याशित रूप से इस्लामाबाद, गिलगिट और नियंत्रण रेखा के समीप कई बार भेजा। तब तक पाकिस्तान नियंत्रण के कश्मीर स्थित आतंकी शिविरों को चिन्हित कर लिया गया। इसके अलावा रॉ भी पाकिस्तानी अफसरों और राजनेताओं के कार्यकलापों पर नजर रख रही थी।

भारतीय पक्ष ने जान-बूझकर अन्य विकल्पों जैसे कूटनीति और संयुक्त राष्ट्र महासभा में ज्यादा ध्यान देकर पाकिस्तान को एक तरह से आश्वस्त कर दिया था कि भारत की तरफ से पहले जैसी ही प्रतिक्रिया होगी। इसके मद्देनजर पाकिस्तान ने अपना ध्यान कूटनीति पर लगाया और विश्व मंच पर 'कश्मीर राग' अलापना शुरू कर दिया।  

इसके बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को लेकर लंबी चर्चा चली। 26 सितंबर को हुई इस चर्चा में शामिल सभी लोगों ने अपने मोबाइल फोन इस्तेमाल करना बंद कर दिए। बेहद सुरक्षित लैंडलाइन पर मीटिंग की जगह तय होती और सरकारी कारों की बजाए सामान्य वाहनों का इस्तेमाल किया गया। इन बैठकों को दिल्ली की अलग-अलग जगहों पर तय किया गया था और सेना के अधिकारी भी इसमें वर्दी के बजाए सादे कपड़ों में शामिल होते थे।

इस बीच भारतीय सेना प्रमुख दलबीर सिंह ने उत्तरी सेना कमान प्रमुख ले. जनरल डीएस हुडा को 1, 4 और 9 पैरा एसएफ से विशेष सैन्य दस्ते को कार्रवाई के लिए तैयार होने का आदेश दिया। 24 सितंबर को सैन्य दस्ता अपने अभियान के लिए तैयार होना शुरू हो गया। इस बीच राष्ट्रीय तकनीकी शोध संस्थान (एनटीआरओ) को भारतीय उपग्रहों को चिन्हित जगहों पर निगरानी रखने का आदेश दिया गया।

एनटीआरओ ने जीपीआरएस से आतंकी लांचिग पैड्स की सटीक स्थिति सेना को बताई, साथ ही अपनी डाइरेक्ट इमेजरी को सीधे दिल्ली के वॉर रूम से अपलिंक भी कर दिया। इसके सहारे ही भारतीय पक्ष ने का सीधा प्रसारण देखा। सैनिकों के हेलमेट पर लगे हाई रिजोल्यूूशन कैमरे सीधे सैैटेलाइट से कनेक्ट थे और पूरी कार्रवाई का सीधा प्रसारण दिल्ली में दिखाई दे रहा था। 

30 सैनिकों के कई विशेष सैन्य दस्ते हेलीकॉप्टर से नियंत्रण रेखा के एकदम समीप उतारे गए और वहां से उन्होंने नियंत्रण रेखा पार की। इस बीच भारतीय सेना ने मोर्टार और भारी मशीनगनों से कवर फायर कर नियंत्रण रेखा के उस पार तैनात पाकिस्तानी सैनिकों को हिलने का मौका भी नहीं दिया। 
 
भारतीय पैरा कमांडो टेवर 15 ऑटोमैटिक राइफल, अंडरबैरल ग्रेनेड लांचर से युक्त एके-47 असॉल्ट राइफल, क्लोज कॉम्बेट ग्लॉक पिस्टल, कमांडो डैगर, हैवी डैमेज ग्रेनेड, स्टन ग्रेनेड्स और सी-4 से लैस थे। नाइटविजन कैमरे और थर्मल इमेजरी वाले हेलमेट कैमरे सीधे सैैटेलाइट से कनेक्ट थे।  
 
बिजली-सी तेजी से सैनिकों ने आगे बढ़ते हुए लांचिंग पैड पर हमले किए। एकसाथ 6 लक्ष्यों पर सटीक कमांडो एक्शन की वजह थी कि आतंकी और पाक सैनिक कोई भी एक-दूसरे की मदद को न आ पाए। वॉच टॉवर पर तैनात संतरियों को भारतीय सेना के कमांडो निशानेबाजों ने वहीं ढेर कर दिया। इसके बाद लांचिंग पैड्स पर मौजूद आतंकियों पर एकसाथ हमला कर 45 से अधिक आतंकियों और उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे 2 पाक सैनिकों को ढेर कर दिया। इन छहों स्थानों को राख के ढेर में बदलकर उड़ी का बदला ले लिया गया।

इस पूरी कार्रवाई में सिर्फ एक भारतीय सैनिक लैंडमाइन पर पैर रखने से हुए धमाके मेंं घायल हुआ, बचे सभी सैनिक सकुशल भारतीय सीमा में लौट आए। 
 
इस पूरी रात को प्रधानमंत्री सहित इस मिशन से जुड़े सभी लोग जाग रहे थे। मिशन पूरा होते थी डीजीएमओ ने अजीत डोभाल को सूचित किया और डोभाल ने प्रधानमंत्री को बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक सफल रही। इसके बाद पीएमओ ने पूर्व प्रधानमंंत्री मनमोहन सिंह और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को इस बारे में बताया।


Saturday, October 8, 2016

लो, अब पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिरा खान ने भी आतंकवादियों को कोस दिया। पर इतनी देर से क्यों?


उड़ी में आतंकवादी हमले के पश्चात सभी भारतीय ताकते बैठे थे कि भारत में रह कर, भारतीय फिल्मों में काम कर के, भारतीयों से मान-सम्मान और मोटा माल कमाने वाले पाकितान से आये कलाकार कब आतंकवाद के विरोध में कुछ फूटेंगे। इस अवधि में अच्छी-खासी वैचारिक धक्कम- धक्की हुई। जहाँ पाकिस्तानी कलाकारों की चुप्पी के कारण भारतीय जनता सुलग रही थी, वही भारत का तथाकथित ‘बुद्धिजीवी’ वर्ग इस सुलगे हुए वर्ग को ये समझाने में लगा हुआ था कि पाकिस्तानी कलाकार केवल कलाकार हैं, आतंकवादी नहीं — जैसे जनता को ये पता ही नहीं था। मानो , बुद्धिजीवियों ने धीमी आंच वाले कोयलों पर सीधा पेट्रोल का छिड़काव कर दिया। फिर हुआ वही जो होना था — जहाँ पाए गए, तहाँ ...... दिए गए तबियत से! कोई मीता वशिष्ठ और ओम पुरी जी से पूछे!




अब इतना सब रामायण-महाभारत होने के बाद पहले फवाद खान ने फेसबुक पर एक ‘शांति सन्देश’ चिपका दिया। आतंकवाद की पुंगी बजाना तो छोड़िये, नाम तक ना लिया उसका। मने, भिया, ऐसा ही करना था तो काहे पोस्टियाए? खैर, आपका फेसबुक पेज… आप चाहे जो छाप दो!
अब माहिरा खान ने फेसबुक पर पोस्ट चेपा है। भगवान्-जीजस-अल्लाह ताला(मने ऊपर वाले के जितने नाम हैं सब को यहाँ उड़ेल लो… हम सेक्युलर हैं!) का लाख-लाख धन्यवाद — कन्या ने इतना साहस और बुद्धि दिखाई कि आतंकवाद को गरिया दिया। उनके पोस्ट के हिंदी अनुवाद पर ध्यान दे  —
“एक अभिनेत्री के रूप में कार्यरत पिछले ५ वर्षों की कालावधि में, मुझे विश्वास है कि मैंने प्रोफेशनल रहकर और अपनी क्षमताओं के द्वारा पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर के सदा अपने देश की गरिमा बनाए रखी।
एक पाकिस्तानी और एक वैश्विक-नागरिक होने के नाते मैं आतंकवाद और खून-खराबे की कड़ी निंदा करती हूँ, चाहे वो किसी भी जगह हो। मुझे खून-खराबे और युद्ध में कोई रूचि नहीं। मैं सदा ऐसे विश्व की आशा करती हूँ जहाँ मेरी संतान इनसे बची रह सके; और सभी से ऐसे विश्व की कामना करने का अनुरोध करती हूँ।
इसी थोड़ी सी कालावधि में समझदारी और भलाई में मेरा विश्वास प्रगाढ़ हुआ है। आपके संदेशों और समर्थन के लिए धन्यवाद।
सदा शांति की कामना और प्रार्थना करते हुए
— माहिरा खान”


अब तक जहाँ लोग ये पूछते रहे कि पाकिस्तानी कलाकार आतंकवाद को गरिया क्यों नहीं रहे, अब दूसरे प्रश्न पर मस्तिष्क का चरखा चला रहे हैं — इस निंदा वाली औपचारिकता/फॉर्मेलिटी के लिए इतना समय क्यों लग गया? अब तक इन्होंने चुप्पी क्यों साध रखी थी?
जब तक ये ‘कलाकार’ मुँह में दही जमाए बैठे थे, तब तक ‘बुद्धिजीवी’ ये तर्क ठेल रहे थे कि अपनी ही सरकार के विरुद्ध कोई बयान देना इन कलाकारों के लिए कठिन कार्य होगा। तो हे महानुभावों, इस तर्क के अनुसार आप कह रहे हैं कि ये लोग जानते-मानते हैं कि इन आतंकी गतिविधियों के पाकिस्तानी सरकार की ही कारगुजारियाँ हैं? यदि ये मान लिया जाए तो इनकी चुप्पी तो और अधिक ‘नमकहरामी’ वाली बात हो जाएगी! भारत में कमा-खा कर भारत पर हुए अत्याचारों पर चुप रहना!
अब आखिरकार इन दो कलाकारों ने कुछ बोला। माहिरा ने संतोष-जनक कुछ कहा, फवाद ने तो… खैर छोडिये। पर अब वही दूसरा प्रश्न मस्तिष्क में चक्करघिन्नी हो रहा है — इतना समय क्यों लग गया? क्या फिल्मों के बहिष्कार के नारों से नींद उड़ी है अब इनकी? नहीं, मल्लब, एक फेसबुक पोस्ट चिपकाने में इतना समय लग गया? अब बचने के लिए केवल ये बहाना बनाया जा सकता है कि इनके यहाँ इन्टरनेट नहीं चल रहा था। बाकी, जनता सयानी है ही… पब्लिक सब जानती है!

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